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सफलता पाना है तो युवा स्वाध्याय करें: अनुनयमती माताजी
इंदौर. सफलता पाने के लिए स्वयं का अध्ययन एवं ग्रंथों का अध्ययन दोनों ही जरूरी है ग्रंथों के अध्ययन से हम आचार्य भगवंत के ज्ञान को हासिल कर सकते हैं और स्वयं के अध्ययन द्वारा हम अपनी क्षमताओं का बेहतर तरीके से आकलन कर सकते हैं.
यह बात आज आर्यिका अनुनयमती माताजी ने पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जबरी बाग नसिया जी में प्रवचन माला के दौरान श्रद्धालुओं से कही. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दीपावली पर हम घरों का कचरा साफ करते हैं वैसे ही ग्रंथ पढऩे से हमारे दिमाग का कचरा साफ होता है और हमारे विचार शुद्ध एवं सात्विक हो जाते हैं जिससे हम अपने जीवन का उद्देश्य समझ व प्राप्त कर सकते हैं.
मंदिरों में दिए गए दान का उपयोग मंदिर एवं धार्मिक कार्यों के लिए ही होना चाहिए. यदि व्यक्ति अथवा मंदिर का पदाधिकारी अपने स्वयं के उपयोग के लिए वह राशि खर्च करता है तो उसका पतन निश्चित है. दिगंबर जैन सामाजिक संसद के संजीव जैन संजीवनी ने बताया कि प्रतिदिन आर्यिका माता जी के प्रवचन सुबह 8.45 से 9.30 बजे तक मंदिर में होते हैं.


